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Harishankar Parsai Birth Anniversary: Quotes by the Indian satirist in Hindi

Parsai’s notable works include Saadachar ka Taabij, Premchand ke Phate Jootey , Bus ki yatra, Ninda Ras, Viklaang Shraddha ka daur and do naak wale log.

By Newsd
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Harishankar Parsai Birth Anniversary: Quotes by the Indian satirist in Hindi

Harishankar Parsai is one of the most accomplished satirists of Hindi Literature. The person who made ‘Vyang’ an important genre was born on August 21, 1922. Parsai won Sahitya Akademi Award in 1982, for his satire, “Viklaang Shraddha Ka Daur”.

The immortal designer of Hindi literature, Harishankar Parsai, was born in Jamnia village in Hoshangabad, Madhya Pradesh. He made fans to his reader by his pinching style and blunt kind of writing. His writing includes both laughter and humour at the same time he successfully serves his serious point on the topic.

Parsai’s notable works include Saadachar ka Taabij, Premchand ke Phate Jootey , Bus ki yatra, Ninda Ras, Viklaang Shraddha ka daur and do naak wale log.

On the occasion of his birth anniversary, here are some quotes by the satirist in Hindi:

  • “स्वामीजी, दुसरे देशो में लोग गाय की पूजा नही करते, पर उसे अच्छी तरह रखते है और वह बहुत खूब दूध देती है”
  • “एक और बात बताइये। कई राज्यो में गौ रक्षा के लिए क़ानून है बाकी में समाप्त हो जाएगा। आगे आप किस बात पर आंदोलन करेंगे?”
  • “स्वामीजी उल्लू लक्ष्मी जी का वाहन है। उसके लिए भी तो कुछ करना चाहिये”
  • “बच्चा , दूसरे देशो की बात छोडो। हम उनसे बहुत ऊँचे है। देवता इसीलिय सिर्फ हमारे यहाँ अवतार लेते है। दुसरे देशो में गाय दूध के उपयोग के लिए होती है, हमारे यहाँ दँगा करने, आंदोलन करने के लिए होती है। हमारी गाय और गायो से भिन्न है”
  • “अरे बच्चा, आंदोलन के लिए बहुत विषय है। सिंह दुर्गा का वाहन है। उसे सर्कस वाले पिंजरे में बंद करके रखते है और उससे खेल कराते है। यह अधर्म है। सब सर्कसो के खिलाफ आंदोलन करके, देश के सारे सर्कस बन्द करवा देंगे। फिर भगवान का एक अवतार मत्स्यावतर भी है। मछली भगवान का प्रतीक है। हम मछुओ के खोलाफ आंदोलन छेड़ देंगे। सरकार का मत्स्यपालन विभाग बन्ध करवा देंगे”
  • “चंदा माँगनेवाले और देनेवाले एक-दूसरे के शरीर की गंध बखूबी पहचानते हैं। लेनेवाला गंध से जान लेता है कि यह देगा या नहीं। देनेवाला भी माँगनेवाले के शरीर की गंध से समझ लेता है कि यह बिना लिए टल जाएगा या नहीं”

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